Advertisement

सीतामढ़ी में AES और इंसेफेलाइटिस को लेकर जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित

सीतामढ़ी में AES और इंसेफेलाइटिस को लेकर जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित
— बच्चों की सुरक्षा और जनजागरूकता पर दिया गया विशेष जोर

सीतामढ़ी:
जिले में AES (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और इंसेफेलाइटिस के प्रभावी नियंत्रण और जनजागरूकता के लिए जिला स्तरीय समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक जिला पदाधिकारी रिची पांडे की अध्यक्षता में परिचर्चा भवन में आयोजित हुई, जिसमें सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला VBD नियंत्रण पदाधिकारी समेत विभिन्न विभागों और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में जिला पदाधिकारी रिची पांडे ने कहा कि चमकी बुखार, यानी AES, बच्चों के मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। मार्च से लेकर नवंबर तक के गर्म और नमी वाले मौसम में यह बीमारी ज्यादा सक्रिय रहती है, खासकर 1 से 15 वर्ष तक के बच्चों में। उन्होंने अपील की कि बुखार, शरीर में ऐंठन या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क किया जाए।

डीएम ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संबंधित जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर ‘संध्या चौपाल’ का आयोजन करें, ताकि समुदाय स्तर पर AES से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके। साथ ही, सभी एम्बुलेंस में आवश्यक दवाइयों और EMT की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि जिले के सभी PHC/CHC में 24 घंटे AES वार्ड की व्यवस्था की गई है, जहां तत्काल जांच और भर्ती की सुविधा उपलब्ध है।

जिला VBD नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर. के. यादव ने बताया कि जिले के हर गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि बच्चों में AES के लक्षण दिखते ही उन्हें समय पर इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को रात में खाना खिलाना बेहद जरूरी है, क्योंकि खाली पेट सोने से बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।

बैठक में DPO (ICDS), पशुपालन विभाग, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, अस्पताल अधीक्षक, डीपीएम (स्वास्थ्य), जीविका, प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक, VDCO, तथा पीरामल फाउंडेशन, PSI, और WHO के प्रतिनिधियों सहित अनेक स्वास्थ्य व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

यह बैठक आने वाले महीनों में AES नियंत्रण को लेकर एक महत्वपूर्ण दिशा तय करती है, जहां प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाएं मिलकर इस गंभीर समस्या से लड़ने की तैयारी में जुटी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *